स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच की २०२६ की वार्षिक बैठक उत्साह के साथ शुरू हुई है, जिसमें दुनिया भर के राजनेता, व्यापारिक दिग्गज और नागरिक समाज के प्रतिनिधि वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने के लिए एकत्रित हुए हैं। इस वर्ष की बैठक का मुख्य केंद्र ‘भविष्य की अर्थव्यवस्थाओं का निर्माण’ और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भी इस मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है, जहाँ भारत को एक स्थिर और तेजी से बढ़ती आर्थिक शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। २० जनवरी की लाइव अपडेट्स के अनुसार, विभिन्न सत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक उपयोग और वैश्विक व्यापार संबंधों को सुधारने पर विशेष जोर दिया गया है।
बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ताएं और निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक आर्थिक नीतियों को दिशा देंगे। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भू-राजनीतिक तनाव और बदलती तकनीक के बीच देशों को आपसी सहयोग बढ़ाना अनिवार्य है। मंच ने समावेशी विकास और हरित ऊर्जा की ओर संक्रमण को बढ़ावा देने के लिए एक नया वैश्विक ढांचा तैयार करने की आवश्यकता पर भी बल दिया है। दावोस से आने वाली ये खबरें न केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह भी संकेत देती हैं कि वैश्विक नेतृत्व आने वाले दशक की चुनौतियों के लिए कितनी सक्रियता से तैयारी कर रहा है।
