नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने अरबपति उद्योगपति अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली वेदांता लिमिटेड के विभाजन (पुनर्विभाजन) की योजना को आधिकारिक तौर पर हरी झंडी दे दी है। इस ऐतिहासिक फैसले के तहत वेदांता के भारतीय परिचालन को पांच अलग-अलग स्वतंत्र और सूचीबद्ध कंपनियों में बांटा जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य कंपनी के विभिन्न व्यवसायों की छिपी हुई वैल्यू को अनलॉक करना और निवेशकों के लिए बेहतर अवसर पैदा करना है। इस मंजूरी के साथ ही डिमर्जर की राह में आने वाली सबसे बड़ी नियामक बाधा दूर हो गई है, जिससे बाजार में सकारात्मक संदेश गया है।
कंपनी की योजना के अनुसार, इस पूरी विभाजन प्रक्रिया को मार्च २०२६ तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस घोषणा के बाद शेयर बाजार में वेदांता के शेयरों में भारी उछाल देखा गया और इसने ₹५८०.४५ का नया सर्वकालिक उच्च स्तर (all-time high) छू लिया। अब कंपनी का ध्यान कर्ज के आवंटन, शेयरधारकों के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे और नई कंपनियों की स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्टिंग की समयसीमा पर केंद्रित होगा। यह पुनर्गठन संसाधनों के प्रबंधन और भविष्य की वृद्धि की दृष्टि से वेदांता समूह के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
