टाटा स्टील के वित्तीय वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही का बेहतर प्रदर्शन हुआ. कंपनी का समेकित शुद्ध मुनाफा टैक्स के बाद सालाना आधार पर 825 प्रतिशत बढक़र 2,730 करोड़ रुपये हो गया. इसी अवधि में कंपनी की आय 57,002 करोड़ रुपये रही, जबकि ईबीआईटीडीए 8,309 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जिसका मार्जिन करीब 15 प्रतिशत रहा. ईबीआईटीडीए में सालाना आधार पर 39 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। टाटा स्टील की ओर से जारी वित्तीय वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही की रिपोर्ट जारी गई गई जिसके तहत भारत में टाटा स्टील का प्रदर्शन और भी मजबूत रहा. देश में कंपनी की आय 35,725 करोड़ रुपये रही और ईबीआईटीडीए 8,291 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जिससे मार्जिन 23 प्रतिशत तक पहुंच गया. कच्चे इस्पात का उत्पादन 12 प्रतिशत बढक़र 6.34 मिलियन टन हो गया. बेहतर उत्पादन के चलते कंपनी की डिलीवरी पहली बार एक तिमाही में 6.04 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची, जो पिछले साल से 14 प्रतिशत ज्यादा है।
विदेशी परिचालन में नीदरलैंड्स से कंपनी को 1,354 मिलियन यूरो का राजस्व मिला और ईबीआईटीडीए 55 मिलियन यूरो रहा. वहां तरल इस्पात उत्पादन 1.68 मिलियन टन और डिलीवरी 1.40 मिलियन टन रही। वहीं ब्रिटेन में कंपनी का राजस्व 468 मिलियन पाउंड रहा और डिलीवरी 0.52 मिलियन टन दर्ज की गई, जो कमजोर मांग और आयात बढऩे के कारण प्रभावित हुई. कंपनी ने इस तिमाही में पूंजीगत खर्च पर 3,291 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में यह खर्च 10,370 करोड़ रुपये रहा। इस दौरान कंपनी का कर्ज तिमाही आधार पर 5,206 करोड़ रुपये घटकर 81,834 करोड़ रुपये पर आ गया. दिसंबर 2025 में टाटा स्टील के बोर्ड ने भारत कारोबार के लिए दीर्घकालिक विकास रणनीति को मंजूरी दी। इसके तहत उत्पादन बढ़ाने, मूल्यवर्धित उत्पादों पर जोर देने, खनन और बुनियादी ढांचे में निवेश करने और पर्यावरण के अनुकूल नई तकनीकों को अपनाने पर ध्यान दिया जाएगा।
इसी क्रम में कंपनी ने टाटा स्टील कलर्स प्राइवेट लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई और थ्रिवेणी पेलेट्स प्राइवेट लिमिटेड में भी बहुमत हिस्सेदारी हासिल की है। टाटा स्टील के सीईओ व ग्लोबल प्रबंध निदेशक टी वी नरेन्द्रन ने कहा कि वैश्विक स्तर पर टैरिफ, भू-राजनीतिक बदलाव व नीतिगत अंतर के कारण बाजार चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, इसके बावजूद भारत में उत्पादन व बिक्री में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है. उन्होंने बताया कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में बिक्री 20 प्रतिशत बढ़ी है और रिटेल कारोबार में भी तेजी आई है. उन्होंने कहा कि भविष्य में प्रस्तावित विस्तार परियोजनाओं से कंपनी के लंबी उत्पाद श्रेणी को मजबूती मिलेगी और कच्चे माल की जरूरतें भी सुरक्षित होंगी. उन्होंने विदेशी बाजारों में सुधार के लिए सहायक नीतियों की जरूरत पर भी जोर दिया।
