सुपौल के गौसपुर से पकड़ा गया 21 वर्षीय हर्षित कुमार अब देशभर की जांच एजेंसियों के रडार पर है। आर्थिक अपराध इकाई (ईओबू) ने उसकी गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को देखते हुए सिम बाक्स मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है। इसके लिए औपचारिक अनुरोध, भेज दिया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही सीबीआइ इस पूरे नेटवर्क की जांच अपने स्तर पर शुरू करेगी, क्योंकि कई देशों के साइबर अपराधियों से उसके संबंध मिलने के बाद मामला और गंभीर हो गया है।जांच में सामने आया है कि हर्षित साइबर ठगी की ट्रेनिंग लेने के लिए चीन तक गया था। वहां वह स्थानीय हैकरों के संपर्क में आया और तकनीक सोखकर भारत लौटा।
इसके अलावा नेपाल, बांग्लादेश, कई देशों से तार जुड़ने से ईओयू जांच का जिम्मा सौंपेगी सीबीआइ को थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में भी उसके संपर्क पाए गए हैं। ईओयू की छापेमारी में मेड इन चाइना सिम बाक्स बरामद होने से यह पुष्टि हुई कि उसने चीन से उपकरण मंगाए थे। सिम बाक्स का पहला मामला राज्य में 21 जुलाई को सामने आया था, जब सुपौल के गौसपुर से ईओयू की टीम ने हर्षित को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान पता चला कि वैशाली के आठ सेल प्वाइंट से खरीदे गए 231 मोबाइल नंबरों में से 149 नंबरों का इस्तेमाल सिर्फ 48 घंटे में 51 हजार काल करने के लिए किया गया था। ये काल साइबर ठगी से जुड़े थे और 30 जून से दो जुलाई 2025 के बीच किए गए थे। कुछ दिन पहले भी 21 जून से 23 जून के बीच वैशाली से जारी 50 मोबाइल नंबरों से 10 हजार से ज्यादा काल किए जा चुके थे। गिरफ्तारी के समय हर्षित के पास आठ सिम बाक्स में लगे 231 सिम मिले थे। साथ ही 294 नए सिम और 800 इस्तेमाल किए हुए सिम भी बरामद हुए। इससे साफ है कि यह नेटवर्क काफी बड़े पैमाने पर काम कर रहा था।
पिछले तीन महीनों में राज्य और आसपास के इलाकों में पांच फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज, पकड़े जा चुके हैं। पहला मामला सुपौल में, दूसरा भोजपुर के नारायणपुर में मिला। बाद में पूर्णिया के बायसी के चरैया और उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भी ऐसे एक्सचेंज पाए गए। समस्तीपुर के रोसड़ा में बैठा एक आरोपित लैपटाप से दोसिम बॉक्स एक्सचेंज चला रहा था। यहां अंतरराष्ट्रीय वीओआइपी काल को लोकल वाइस काल में परिवर्तित कर साइबर ठगी की जा रही थी। पांच से अधिक देशों की यात्रा कर चुका है आरोपित हर्षित: जांच में यह भी पता चला है कि हर्षित चीन, वियतनाम, थाइलैंड नेपाल एवं बंगलादेश सहित पांच देशों की यात्रा कर चुका है और साइबर ठगी के पैसों से उसने लगभग 10 देशों में निवेश किया। दो क्रिप्टो एक्सचेंज पर उसके खातों में तीन करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली है। वह फेसबुक और अन्य आनलाइन प्लेटफार्म के जरिए चीन, वियतनाम, कंबोडिया, जर्मनी, हांगकांग सहित कई देशों के नागरिकों से जुड़ा। इसी रास्ते वह टेलीग्राम गुप्स में शामिल हुआ और वहीं से उसे चार सिम बाक्स वियतनाम से और चार चीन से मिले। यह गिरोह समानांतर एक्सचेंज चला रहा था।सिम बाक्स से ठगी मामले में चीन सहित कई देशों से तार जुड़ने के कारण इसकी जांच अब सीबीआइ को सौपी जाएगी। जल्द ही इससे जुड़े सभी मामलों का जिम्मा सीबीआइ लेते हुए इसका अनुसंधान शुरू करेगी। इसकी सूचना सीबीआइ को भेज दी गई है।नैयर हसनैन खान, एडीजी, आर्थिक अपराध इकाई, पटना।
