टाटा समूह के भीतर आंतरिक रणनीतिक मतभेदों की खबरें सामने आ रही हैं, जहाँ टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस के प्रस्तावित आईपीओ को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। रिपोर्टों के अनुसार, नोएल टाटा द्वारा आईपीओ प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों और चिंताओं के कारण समूह के वर्तमान नेतृत्व के पुनर्गठन और चेयरमैन की पुनर्नियुक्ति की प्रक्रिया में देरी हुई है। नोएल टाटा का मानना है कि इस तरह के बड़े कदम से पहले समूह के भविष्य के ढांचे और नियंत्रण पर स्पष्टता होना आवश्यक है, जो वर्तमान प्रबंधन की योजनाओं से भिन्न हो सकता है।
यह विवाद मुख्य रूप से टाटा संस को सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध करने की कानूनी अनिवार्यता और टाटा ट्रस्ट्स के नियंत्रण को बनाए रखने के बीच संतुलन से जुड़ा है। नोएल टाटा के इस “सख्त रुख” ने समूह की निर्णय लेने की प्रक्रिया को प्रभावित किया है, जिससे निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना है। टाटा संस का आईपीओ भारत के कॉर्पोरेट इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक हो सकता है, लेकिन अब यह मामला बोर्डरूम चर्चाओं और नेतृत्व की प्राथमिकताओं के बीच उलझता हुआ दिखाई दे रहा है।
