झारखंड सरकार ने राज्य विधानसभा को सूचित किया है कि वह झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं के लिए ‘कट-ऑफ’ उम्र सीमा से संबंधित अभ्यर्थियों की चिंताओं पर सक्रिय रूप से विचार कर रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सदन को आश्वासन दिया कि सरकार उन उम्मीदवारों को राहत देने के लिए नियमों की समीक्षा कर रही है, जो पिछले कुछ वर्षों में परीक्षाओं के आयोजन में देरी के कारण अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके हैं। इस मुद्दे को विपक्षी और सत्तापक्ष दोनों के विधायकों ने जोर-शोर से उठाया था, जिसमें तर्क दिया गया कि राज्य के युवाओं को उनकी गलती के बिना अवसर से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि कार्मिक विभाग को इस विसंगति को दूर करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। सरकार उन ४० वर्ष या उससे अधिक आयु के अभ्यर्थियों के लिए आयु में छूट देने की संभावना तलाश रही है जिन्होंने कोरोना महामारी या प्रशासनिक कारणों से परीक्षा के लंबे अंतराल के दौरान अपनी पात्रता खो दी थी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य एक ऐसी पारदर्शी और समयबद्ध चयन प्रक्रिया स्थापित करना है जिससे राज्य के शिक्षित युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके। इस सकारात्मक प्रतिक्रिया से उन हजारों उम्मीदवारों में उम्मीद की किरण जगी है जो आगामी १४वीं और १५वीं परीक्षाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
