कोल्हान यूनिवर्सिटी पुरुष फुटबॉल टीम ने ईस्ट जोन इंटर यूनिवर्सिटी फुटबॉल टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए शुक्रवार को महाराज श्री चंद्र भांजा यूनिवर्सिटी को 8-0 गोल के अंतर से हरा दिया।शुरूआती सीटी से ही, कोल्हान विश्वविद्यालय ने बेहतर कौशल, समन्वय और आक्रामक इरादे का प्रदर्शन करते हुए पूरे मैच में अपने विरोधियों को पूरी तरह से मात दे दी। टीम ने मिडफील्ड और डिफेंस में मजबूत नियंत्रण बनाए रखा और विपक्षी टीम को गोल करने का कोई मौका नहीं दिया। दुर्गा हेम्ब्रोम शानदार हैट्रिक (3 गोल) के साथ मैच की स्टार बनकर उभरीं। महेंद्र बारी ने दो गोल का योगदान दिया, जबकि सोनम तामसोय, जदुनाथ मुर्मू और सूरज हेम्ब्रोम ने एक-एक गोल किया, जिससे व्यापक जीत पक्की हो गई। इस प्रभावशाली जीत के साथ, कोल्हान यूनिवर्सिटी फुटबॉल टीम प्री-सेमीफाइनल में पहुंच गई है, जहां कल होने वाले महत्वपूर्ण मुकाबले में उनका सामना रेवेनशॉ यूनिवर्सिटी, कटक से होगा।
टीम की सफलता का श्रेय टीम मैनेजर डॉ. पी.के. चंचल, टीम कोच विकाश मुंडा और सहायक कोच जयपाल सिकराल के समर्पित प्रयासों और रणनीतिक मार्गदर्शन को दिया गया, जिन्होंने टीम की तैयारी और प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जानकारी के अनुसार इस्ट जोन के इतिहास में क्वार्टर फाइनल स्तर पर यह किसी भी टीम की अब तक सबसे बड़ी जीत है। कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो डा अंजिला गुप्ता, कुलसचिव डा रणजीत कुमार कर्ण, डीएसडब्ल्यू डा संजय यादव,वित पदाधिकारी डा संजय यादव, कुलानुशासक डा राजेन्द्र भारती, खेल पदाधिकारी डा मन्मथसिंह प्रवक्ता और एलबीएसएम कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार झा एवं अन्य सभी पदाधिकारियों ने खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए बधाई दी और आगामी प्री-सेमीफाइनल मैच में सफलता के लिए अपना आशीर्वाद और शुभकामनाएं दीं.सदर अस्पताल में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 10 जनवरी को नारायणा हॉस्पिटल, कोलकाता व ब्रह्मानंद नारायणा हॉस्पिटल, जमशेदपुर की ओर से थैलेसीमिया व सिकल सेल एनीमिया से पीडि़त बच्चों के इलाज के नि:शुल्क जांच व परामर्श शिविर का आयोजन किया जाएगा. इस शिविर में 12 वर्ष से कम आयु के थैलेसीमिया व सिकल सेल एनीमिया से पीडि़त बच्चों, उनके भाई बहन व उनके माता पिता का नि:शुल्क ह्यूमन ल्युकोसाइट एंटीजन टेस्ट किया जाएगा. यह जांच ऐसे बच्चों के इलाज ( बोन मेरो ट्रांसप्लांट ) का पहला चरण होता है।
जांच की प्रक्रिया के बाद, बोन मेरो ट्रांसप्लांट के लिए योग्य बच्चों का नारायणा हेल्थ की ओर से झारखंड सरकार एवं अन्य संस्थानों के सहयोग से निशुल्क बोन मेरो ट्रांसप्लांट किया जाएगा. सिविल सर्जन डा. साहिर पॉल ने कहा कि थैलेसीमिया एक रक्त विकार है जो बच्चों को माता-पिता से विरासत में मिलता है. ऐसी स्थिति में शरीर सामान्य से कम हीमोग्लोबिन बनाता है. हीमोग्लोबिन एक प्रोटीन है जो लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाता है व यह शरीर के सभी हिस्सों में ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करता है। पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन न मिलने के कारण मरीज को मुख्य रूप से कमजोरी और सांस लेने की समस्या हो जाती है, इसमें पीडि़त बच्चों के शरीर में रक्त की भारी कमी होने लगती है जिसके कारण उसे बार-बार बाहरी खून चढ़ाने की आवश्यकता होती है. सदर अस्पताल के उपाधीक्षक सह शिशु रोग विशेषज्ञ डा. कमलेश कुमार प्रसाद ने कहा की इसका इलाज बोन मेरो ट्रांसप्लांट है व इस दिशा में जिला प्रशासन, पूर्वी सिंहभूम नारायणा हेल्थ के सहयोग से नि:शुल्क शिविर का आयोजन किया जाएगा।
