झारखंड के लातेहार जिले के मनिका ब्लॉक स्थित एक गाँव में चार परिवारों का कथित तौर पर सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है। इन परिवारों पर आरोप है कि उन्होंने स्वेच्छा से ईसाई धर्म अपना लिया है, जिसके बाद ग्राम परिषद ने उनके सार्वजनिक सुविधाओं के उपयोग पर रोक लगा दी। इन परिवारों को गाँव के सार्वजनिक तालाब से पानी भरने, मवेशी चराने और जंगल से सूखी लकड़ी इकट्ठा करने से मना कर दिया गया है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि उन्हें गाँव के सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होने से भी वंचित कर दिया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने हस्तक्षेप किया है। पुलिस अधिकारियों ने गाँव का दौरा किया और ग्रामीणों के साथ बैठक कर उन्हें चेतावनी दी कि इस तरह का भेदभाव और बहिष्कार कानूनन अपराध है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद का धर्म चुनने और उसका पालन करने की स्वतंत्रता देता है। प्रशासन ने ग्रामीणों को समझाया कि वे कानून अपने हाथ में न लें और सामाजिक सद्भाव बनाए रखें। वर्तमान में स्थिति नियंत्रण में है और पुलिस इन चारों परिवारों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की बहाली सुनिश्चित करने के लिए मामले पर कड़ी नजर रख रही है।
