सिविल कोर्ट के वरीय अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन व राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा को पत्र लिख कर अवगत कराया है कि झारखंड राज्य बार काउंसिल चुनाव के लिए अतार्किक जमानत राशि 1.25 लाख रुपए निर्धारित कर चुनाव की पात्रता रखने वाले वंचित समूह व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अधिवक्ताओं को चुनावी प्रक्रिया से बाहर करने की नीतिगत निर्णय लगता. उन्होंने मांग की कि इस मामले पर हस्तक्षेप पर न्यूनतम जमानत राशि कराने में भूमिका निभाएं। उन्होंने इसकी प्रति सुपीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, झारखंड हाईकोर्ट केे मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, झारखंड सरकार के महाधिवक्ता व झारखंड राज्य बार काउंसिल के चेयरमैन को भी भेजने की बात कही।
उन्होंने अपने में लिखा है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को लिखे पत्र में कहा कि वे स्वयं संयुक्त बिहार से संबंधित हैं व भली भांति जानते हैं कि बिहार व झारखंड बीमारू व गरीब राज्य हैं. आर्थिक पायदान में देश के सबसे गरीब राज्यों में दोनों शामिल है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड राज्य बार काउंसिल का सदस्य बनने के लिए नए अधिवक्ताओं के एनरोलमेंट के लिए न्यूनतम दर अर्थात 1000 से भी कम निर्धारित कर रखी है. उन्होंने कहा कि देश लोकतांत्रिक है और संस्थानों में भी लोकतांत्रिक मूल्य व व्यवस्था बनाए रखना नितांत व आवश्यक शर्त है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था में ज्यादा से ज्यादा जिम्मेदार एवं सांस्थानिक सदस्यों की भागीदारी संभव हो सके।
उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य बार काउंसिल के पिछले चुनाव में जमानत राशि रुपए मात्र 10000 रुयये थी, जिसे इस वर्तमान प्रस्तावित चुनाव हजार गुणा बढ़ाकर मात्र 1,25,000 रुपये कर दिया गया कि अव्यावहारिक, अतार्किक, असंगत, असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक है. उन्होंने कहा कि बार काउंसिल ने अपने फैसलों पर सदस्यों से स्वीकृति की मुहर नहीं लगवायी है, इससे साफ है कि बार काउंसिल का यह फैसला मनमाना, गैर कानूनी व असंवैधानिक है।
