सरकार ने महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के तेजी से बढऩे के खतरा को देखते हुए बड़ी पहल की है जिसके तहत अब ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) वैक्सीन नि:शुल्क मिलेंगी. अब निर्धारित 14 वर्ष की किशोरियों को सरकारी स्वास्थ्य विभाग विभाग के माध्यम से नि:शुल्क दी जाएगी. बाजार में एचपीवी वैक्सीन की कीमत करीब 10 हजार रुपये हैं। शुक्रवार को सिविल सर्जन कार्यालय में चिकित्सकों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता सिविल सर्जन डा. साहिर पॉल ने की. रांची से आए विशेषज्ञों ने पूर्वी सिंहभूम जिले के सभी चिकित्सा पदाधिकारियों को एचपीवी संक्रमण, उसके दुष्प्रभाव व टीकाकरण की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने कहा कि 25 जनवरी तक जिले के सभी चिकित्सक, एएनएम, सहिया और अन्य संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षण पूरा कर लिया जाएगा, जिससे टीकाकरण अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके।
सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के गर्भाशय की ग्रिवा (सर्विक्स) में होने वाला कैंसर है, जिसका कारण एचपीवी संक्रमण माना जाता है, जो प्राय: असुरक्षित यौन संपर्क से फैलता है। शुरुआती चरण में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, जिस कारण बीमारी का पता देर से चलता है, जो खतरनाक साबित होता. इस मौके पर सिविल सर्जन डा. साहिर पॉल ने कहा कि एचपीवी कम से कम छ: प्रकार के कैंसर का कारण बन सकता है जिनमें 70 प्रतिशत से अधिक गर्भाशय-ग्रिवा (सर्वाइकल) और गुदा कैंसर से जुड़े होते हैं. उन्होंने कहा कि कई बार एचपीवी संक्रमण बिना किसी लक्षण के भी होता है और संक्रमित व्यक्ति अनजाने में वायरस दूसरों तक फैला सकता है। राज्य मुख्यालय से आए प्रशिक्षक रतिश कुमार माझी, स्टेट टेक्निकल आफिसर, रांची ने बताया कि अधिकांश एचपीवी संक्रमण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता के कारण स्वयं ही समाप्त हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यही संक्रमण आगे चलकर कैंसर का रूप ले लेता है।
ऐसे में टीकाकरण सबसे सुरक्षित और प्रभावी बचाव उपाय है. देश में प्रत्येक वर्ष करीब 1.20 लाख से अधिक महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के नए मामले सामने आते हैं, जबकि करीब 75 हजार महिलाओं की मौत इस बीमारी के कारण हो जाती है।ऐसे में सभी पात्र किशोरियों को समय पर एचपीवी वैक्सीन लगा दी जाए, तो भविष्य में इन मौतों की संख्या में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है. आस्ट्रेलिया ने एचपीवी वैक्सीनेशन को राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल किया है।इसके बाद वहां सर्वाइकल कैंसर के मामलों में तेजी से गिरावट दर्ज की गई। जिला आरसीएच पदाधिकारी डा. रंजीत कुमार पांडा ने कहा कि एचपीवी से जुड़े किसी भी लक्षण पर एआइ, गूगल या इंटरनेट से उपचार खोजने के बजाय प्रशिक्षित चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
