भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मध्य पूर्व में जारी तनाव और युद्ध की स्थिति पर भारत के दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए कहा है कि वर्तमान परिस्थितियों में ईरानी नेतृत्व के साथ सीधा संपर्क स्थापित करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने रेखांकित किया कि क्षेत्र में अस्थिरता और संघर्ष के कारण कूटनीतिक संवाद के मार्ग प्रभावित हुए हैं। भारत इस पूरे संकट पर बारीकी से नजर रखे हुए है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति व संयम की अपील कर रहा है ताकि मानवीय संकट को और गहराने से रोका जा सके।
जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की प्राथमिकता क्षेत्र में मौजूद अपने नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता सुनिश्चित करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संवाद और कूटनीति ही किसी भी विवाद का स्थायी समाधान हो सकते हैं, लेकिन मौजूदा सैन्य संघर्ष ने बातचीत के वातावरण को जटिल बना दिया है। भारत वैश्विक शक्तियों के साथ मिलकर तनाव कम करने के प्रयासों में जुटा है, क्योंकि मध्य पूर्व में किसी भी प्रकार का बड़ा विस्तार वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है।
