मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन (OHE) मस्तों की स्थापना के साथ निरंतर प्रगति हो रही है। यह विकास भारत की पहली हाई-स्पीड रेल प्रणाली के लिए विद्युत कर्षण सक्षम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत ज़मीनी स्तर पर सशक्त क्रियान्वयन को दर्शाता है। इससे वैश्विक स्तर पर सिद्ध हाई-स्पीड रेल तकनीक को अपनाते हुए घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को भी मज़बूती मिलती है। OHE मस्तों की स्थापना संरेखण (अलाइनमेंट) के प्रमुख हिस्सों, विशेषकर वायाडक्ट खंडों पर की जा रही है, ताकि सुरक्षित, सुचारु और कुशल हाई-स्पीड ट्रेन संचालन सुनिश्चित किया जा सके। ये मस्त बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए विश्वसनीय बिजली आपूर्ति हेतु आवश्यक कर्षण अवसंरचना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
OHE मस्त ऊँचे वायाडक्ट पर ज़मीन से काफी ऊँचाई पर स्थापित किए जा रहे हैं। कुल मिलाकर, पूरे कॉरिडोर में 9.5 से 14.5 मीटर ऊँचाई के 20,000 से अधिक मस्त लगाए जाएंगे। ये मस्त पूर्ण 2×25 केवी ओवरहेड कर्षण विद्युत प्रणाली को सहारा देंगे, जिसमें ओवरहेड तार, अर्थिंग व्यवस्था, फिटिंग्स और बुलेट ट्रेन संचालन के लिए आवश्यक अन्य सहायक उपकरण शामिल हैं। निर्बाध कर्षण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए, मुंबई–अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के साथ ट्रैक्शन सबस्टेशन (TSS) और डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशन (DSS) का एक नेटवर्क भी विकसित किया जा रहा है।
OHE मस्त ऊर्ध्वाधर इस्पात संरचनाएँ होती हैं, जो रेलवे ट्रैक के किनारे स्थापित की जाती हैं और ओवरहेड विद्युत तारों को सहारा देती हैं। ये तारों की सही ऊँचाई, संरेखण और तनाव बनाए रखती हैं, जिससे इलेक्ट्रिक ट्रेनों को निरंतर और सुरक्षित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होती है। परियोजना के पूरा होने पर, मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा अधिक तेज़ और सुविधाजनक हो जाएगी, साथ ही पूरे कॉरिडोर में कनेक्टिविटी में सुधार होगा। इस परियोजना से यात्रियों, स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं और भारतीय उद्योग को रोज़गार सृजन और सुदृढ़ विनिर्माण के माध्यम से लाभ मिलने की उम्मीद है। यह देश में उन्नत रेल तकनीक को अपनाने और विश्वस्तरीय रेल अवसंरचना के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।
