बिहार राज्य अभिलेखागार इतिहास के एक प्रहरी के रूप में खड़ा है, जहाँ प्राचीन मुगल फरमानों से लेकर आधुनिक चुनावी रोल तक सब कुछ सुरक्षित है। पटना स्थित इस संस्थान में १७७२ से १९६० के बीच के १० लाख से अधिक प्राथमिक दस्तावेज मौजूद हैं, जो इतिहासकारों और सरकारी अधिकारियों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। यहाँ नौ रिपोजिटरी (भंडार गृह) में उद्योग, शिक्षा, ग्राम पंचायत और राजस्व बोर्ड जैसे विभागों की फाइलें सहेज कर रखी गई हैं, जो शासन के क्रमिक विकास को दर्शाती हैं। अभिलेखागार की महत्ता तब और स्पष्ट हुई जब एनआरसी की घोषणा के समय बड़ी संख्या में लोग अपने पूर्वजों के प्रमाण की तलाश में यहाँ पहुँचे।
दस्तावेजों को समय की मार से बचाने के लिए अभिलेखागार में २०१३ से डिजिटलीकरण का कार्य चल रहा है, जिसके तहत अब तक १.५० करोड़ पन्नों (फोलियो) को डिजिटल रूप दिया जा चुका है। इसके साथ ही, एक विशेष संरक्षण विंग रसायनों और जापानी टिश्यू पेपर का उपयोग करके फफूंद और कीटों से प्रभावित पुरानी फाइलों की मरम्मत करता है। संस्थान में २५,००० से अधिक पुस्तकों का पुस्तकालय भी है, जिसमें राम शरण शर्मा जैसे प्रसिद्ध इतिहासकारों का संग्रह शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एक भी पन्ना नष्ट होता है, तो उसके साथ इतिहास का एक हिस्सा हमेशा के लिए खो जाता है, इसलिए यहाँ ‘हर पन्ना कीमती’ के सिद्धांत पर काम किया जाता है।
