माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री नेटवर्क (MFIN) बिहार विधानसभा द्वारा 26 फरवरी, 2026 को “बिहार सूक्ष्म वित्त संस्थाएँ (धन उधार विनियमन एवं प्रपीड़क कार्रवाई निवारण) विधेयक, 2026” को पारित किए जाने का संज्ञान लेता है। MFIN, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा विनियमित संस्थाओं (एनबीएफसी-एमएफआई, बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक (एसएफबी) एवं एनबीएफसी) का एक स्व-नियामक संगठन (SRO) है। MFIN यह स्पष्ट करता है कि विधान सभा द्वारा पारित इस विधेयक की धारा 2(2) के अनुसार, RBI-विनियमित माइक्रोफाइनेंस संस्थानों पर ये लागू नहीं होता है। तदनुसार, RBI द्वारा विनियमित अथवा लाइसेंस प्राप्त संस्थाओं को राज्य स्तर पर पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं है।
MFIN विधेयक में उधारकर्ताओं के संरक्षण तथा निष्पक्ष ऋण वसूली प्रथाओं से संबंधित उन प्रावधानों का संज्ञान लेता है, जो सभी ऋणदात्री संस्थाओं पर लागू हैं। MFIN यह पुनः स्पष्ट करना चाहता है कि RBI-विनियमित संस्थान पहले से ही वित्तीय क्षेत्र में उधारकर्ता संरक्षण के सबसे सुदृढ़ ढाँचों में से एक के अंतर्गत कार्य कर रहे हैं। यह ढाँचा RBI के विस्तृत व्यावसायिक आचरण दिशा-निर्देशों, MFIN की उद्योग आचार संहिता (Industry Code of Conduct) तथा MFIN Guardrails पर आधारित है, जो सामूहिक रूप से निष्पक्ष व्यवहार, पारदर्शी ऋण प्रक्रियाओं तथा जिम्मेदार एवं गैर-प्रपीड़क वसूली व्यवस्था सुनिश्चित करते हैं। यह उल्लेखनीय है कि वर्तमान में RBI-विनियमित संस्थान बिहार में लगभग 1 करोड़ निम्न-आय वर्ग के ग्राहकों को ₹48,569 करोड़ के ऋण के साथ बिना जमानत एवं घर-द्वार पर ऋण सेवाएँ उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे समावेशी एवं समृद्ध बिहार के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका परिलक्षित होती है।
MFIN माइक्रोफाइनेंस उधारकर्ताओं से अपील करता है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, अपनी अच्छी ऋण पात्रता बनाए रखने हेतु नियमित रूप से ऋण पुनर्भुगतान करें तथा किसी भी जानकारी या स्पष्टीकरण के लिए अपने ऋणदाता से संपर्क करें। इसके अतिरिक्त, MFIN बिहार प्रदेश में लक्षित जागरूकता एवं जनसंपर्क पहल भी संचालित करेगा, ताकि RBI-विनियमित माइक्रोफाइनेंस संस्थानों द्वारा अपनाए जाने वाले उधारकर्ता संरक्षण उपायों, पारदर्शी ऋण प्रक्रियाओं, शिकायत निवारण तंत्र तथा जिम्मेदार एवं गैर-प्रपीड़क वसूली प्रथाओं के संबंध में जन-जागरूकता को सुदृढ़ किया जा सके।
