जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर आतंकवादी घुसपैठ के बढ़ते खतरों को देखते हुए भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल ने अपनी निगरानी व्यवस्था को अत्यधिक कड़ा कर दिया है। खुफिया सूचनाओं के अनुसार, सीमा पार आतंकी लॉन्च पैड्स पर हलचल बढ़ गई है, जिसे देखते हुए सुरक्षा बलों ने संयुक्त ‘क्षेत्र-प्रभुत्व अभ्यास’ शुरू किए हैं। सर्दियों के मौसम में घने कोहरे और कम दृश्यता का फायदा उठाकर आतंकियों द्वारा घुसपैठ की कोशिशों को रोकने के लिए यह हाई-अलर्ट जारी किया गया है।
सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए सेना और बीएसएफ आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग कर रहे हैं, जिसमें ड्रोन, थर्मल इमेजिंग उपकरण और स्मार्ट फेंसिंग शामिल हैं। राजौरी, उरी और पुंछ जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में रात-दिन गश्त बढ़ानी गई है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ एक मजबूत ‘एंटी-इनफिल्ट्रेशन ग्रिड’ (घुसपैठ विरोधी तंत्र) बनाए हुए हैं, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
