झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया स्थित अरका जैन यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसका विषय था “शिक्षा में ज़ीरो इन्वेस्टमेंट इनोवेशन : चुनौतिययां और अवसर।” इस सम्मेलन ने इस धारणा को सफलतापूर्वक चुनौती दी कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए भारी वित्तीय निवेश की आवश्यकता होती है, और उत्कृष्टता के प्रमुख चालक के रूप में नवाचार, सहयोग और बौद्धिक पूंजी पर जोर दिया।
शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र एवं अन्य विषयों पर चर्चा
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैनेजमेंट स्कूल्स (AIMS पूर्वी क्षेत्र) के उपाध्यक्ष सरोज कुमार साहू ने सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन किया। इसके बाद सम्मेलन के मुख्य एवं उप विषयों पर गहन चर्चा हुई। इसमें MOOCs, सहयोगी शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र और खुले ज्ञान प्रणालियों जैसे गैर-वित्तीय प्लेटफार्मों के माध्यम से पहुंच, समानता, शैक्षणिक गुणवत्ता और रोज़गार क्षमता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
50 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए
सम्मेलन में देश भर के 35 कॉलेजों के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और शिक्षा नेतृत्वकर्ताओं ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप नवीन और टिकाऊ शैक्षिक प्रथाओं पर विचार-विमर्श किए। सम्मेलन के दूसरे दिन पांच विषयगत ट्रैक पर प्रतिभागियों ने 50 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए। सम्मेलन के समापन सत्र में मुख्य रूप से शामिल औद्योगिक संबंधों एवं श्रम कल्याण के विशेषज्ञ और औद्योगिक संबंधों में वर्ल्ड आइकन अवार्ड प्राप्तकर्ता डॉ. शहनवाज आलम ने अपने सारगर्भित विचार रखे।
ये थे उपस्थित
सम्मेलन में कई प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े शिक्षाविदों ने शिरकत की। इनमें AIMS के पूर्व अध्यक्ष रमाकांत पात्रा, करीम सिटी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. मोहम्मद रियाज़, आरवीएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के प्रिंसिपल डॉ. राजेश कुमार तिवारी, जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय की कॉमर्स विभागाध्यक्ष डॉ. दीपा शरण, लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अशोक कुमार झा और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) जमशेदपुर की डॉ. स्वाति सुधा, समेत कई विशिष्ट लोग शामिल थे।
