February 28, 2026
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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को विपक्षी इंडिया गठबंधन की कमान मिल सकती है। 3 सियासी फैक्टर से इस बात के संकेत मिल रहे हैं। ममता ने हाल ही में इंडिया गठबंधन की कमान संभालने की इच्छा जताई थी। टीएमसी सुप्रीमो ने कहा था कि अगर मुझे इसकी जिम्मेदारी मिलती है, तो मैं गठबंधन को लीड कर सकती हूं। जुलाई 2023 में 26 विपक्षी दलों ने मिलकर इंडिया नाम से एक गठबंधन तैयार किया था, जिसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, एनसीपी(शरद), शिवसेना (उद्धव) डीएमके, तृणमूल, आरजेडी, सीपीएम और झामुमो जैसी पार्टियां शामिल हुई थी। जुलाई 2023 में बेंगलुरु की एक बैठक में विपक्षी दलों ने मिलकर इंडिया गठबंधन तैयार किया था। तब से 17 महीने बीत गए हैं, लेकिन गठबंधन के भीतर चेयरमैन का पद रिक्त है।

जनवरी 2024 में गठबंधन ने नीतीश कुमार को यह पद ऑफर किया था, लेकिन उन्होंने लेने से इनकार कर दिया। बाद में नीतीश खुद इंडिया से बाहर चले गए और एनडीए में शामिल हो गए। इसके बाद चेयरमैन पद के लिए कई नामों की चर्चा हुई, लेकिन आपसी सहमति की वजह से किसी एक नाम पर फैसला नहीं हो पाया। हरियाणा और महाराष्ट्र में इंडिया गठबंधन की हार के बाद ममता ने चेयरमैन पद पर दावा ठोक दिया है। 3 सियासी फैक्टर से ममता की दावेदारी को बल भी मिल रहा है। इंडिया गठबंधन के भीतर कांग्रेस के पास तृणमूल, सपा, एनसीपी (शरद), आरजेडी, डीएमके जैसी पार्टियां मजबूत स्थिति में है। ममता ने जब इंडिया के भीतर इस पद को लेकर दावेदारी की तो उनके समर्थन में शरद पवार से लेकर लालू यादव और राम गोपाल से लेकर उद्धव ठाकरे तक उतर गए हैं। शरद पवार का कहना है कि ममता में यह क्षमता है और उन्हें यह पद देने पर विचार किया जा सकता है। शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत ने भी मामले में विचार करने की बात कही है।

आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव ने भी ममता की पैरवी की है। लालू का कहना है कि ममता इंडिया गठबंधन का नेतृत्व अच्छे से कर सकती हैं। अखिलेश यादव की सपा तो खुलकर ममता के समर्थन में बोल रही है। पार्टी महासचिव राम गोपाल यादव ने तो यहां तक कह दिया कि राहुल गांधी गठबंधन के नेता नहीं हैं। सपा लोकसभा में देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है। आंध्र की सत्ता से दूर वाईएसआर ने भी ममता की दावेदारी का समर्थन किया है।

वाईएसआर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विजयसाई रेड्डी का कहना है कि ममता आदर्श उम्मीदवार हैं। जगनमोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर अभी इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है। पार्टी आंध्र की राजनीति करती है, जहां उसका मुख्य प्रतिद्वंद्वी टीडीपी है, जो अभी एनडीए में शामिल हैं। यहां कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ती है। कांग्रेस और वाईएसआर के बीच 36 के आंकड़े है। जगनमोहन पहले कांग्रेस में ही थे लेकिन 2011 में पार्टी से नाता तोड़ उन्होंने खुद की पार्टी बना ली। वर्तमान में जगन की बहन शर्मिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष हैं। इंडिया गठबंधन के गठन के बाद अब तक 12 राज्यों में विधानसभा के चुनाव हुए हैं। इनमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हरियाणा, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के चुनाव प्रमुख हैं। मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बीजेपी का सीधा मुकाबला कांग्रेस से था। कांग्रेस पार्टी चारों ही राज्यों में बुरी तरह चुनाव हार गई। वहीं झारखंड में बीजेपी का सीधा मुकाबला झामुमो और कांग्रेस से था, जहां बीजेपी हार गई। इसी तरह कांग्रेस जम्मू कश्मीर में छोटे भाई की भूमिका में थी और यहां भी इंडिया गठबंधन ने बीजेपी को पटखनी दे दी। यानी जहां-जहां कांग्रेस छोटे भाई की भूमिका में है, वहां तो गठबंधन को जीत मिली रही है, लेकिन जहां खुद आगे रहती है वहां हार जाती है। ममता बनर्जी की गिनती देश की सबसे मुखर राजनेताओं में होती है। महिला फेस होना भी ममता के पक्ष में है। देश और विपक्ष के पास ममता बनर्जी जैसा फाइटर महिला नेता नहीं है, जिनकी लोकप्रियता भी हो। ममता लगातार तीन बार से बंगाल की मुख्यमंत्री पद पर काबिज हैं। 2021 के बाद बंगाल की करीब 30 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए हैं। एक-दो सीट को अगर छोड़ दिया जाए तो सभी सीटों पर ममता ने बीजेपी को पटखनी दी है। यानी सीधी लड़ाई जीतने में भी ममता सक्षम है। ममता का सियासी जड़ें भी कांग्रेस की ही रही है। ममता ने राजनीतिक करियर की शुरुआत युवा कांग्रेस से किया था। 1998 में मतभेद के बाद उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। 

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